नमस्कार प्यारे माता पिता और प्यारे दोस्तों जैसा की आप सभी लोग जानते हैं की दांत निकलते समय बच्चा बहुत रोता है, क्या करें? जैसे की बच्चे की परवरिश का हर पड़ाव माता-पिता के लिए एक नया अनुभव लेकर आता है। उनमें से एक बड़ा और थोड़ा मुश्किल पड़ाव होता है — जब बच्चे के दांत निकलने शुरू होते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया 6 महीने की उम्र के बाद शुरू होती है और 2.5 से 3 साल की उम्र तक चलती रहती है। इस दौरान बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है, वह बार-बार रो सकता है और अक्सर रातों को जाग भी सकता है। हम आप को विस्तार से समझाते कि दांत निकलते समय बच्चा क्यों रोता है, उसके लक्षण क्या हैं और घर पर माता-पिता किस तरह से बच्चे को आराम पहुँचा सकते हैं।
जैसा की आप सभी जानते हैं की हम अपने पिछले Articles में भी आपको सेहत से जुड़ी अच्छी सलाह देते आए हैं और आज का ये आर्टिकल भी काफी खास होने वाला है तो इसीलिए आप पोस्ट के अंत तक जरूर बने रहिए।
दांत निकलने की प्रक्रिया क्या होती है?
शिशु के मसूड़ों के नीचे पहले से मौजूद दूध के दांत धीरे-धीरे बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया प्राकृतिक होती है लेकिन इसके साथ दर्द, सूजन, जलन और बेचैनी आना आम बात है।
दांत निकलने की समयसीमा इस प्रकार होती है:
| उम्र | कौन सा दांत |
| 6-10 महीने | नीचे के सामने के दांत (Central Incisors) |
| 8-12 महीने | ऊपर के सामने के दांत |
| 9-16 महीने | साइड वाले दांत (Lateral Incisors) |
| 13-19 महीने | पहले मोलर |
| 16-23 महीने | कैनाइन |
| 23-33 महीने | आखिरी मोलर |

बच्चा क्यों बहुत रोता है दांत निकलते समय?
जब दांत निकलते समय बच्चा बहुत रोता है, तो मां-बाप का दिल भी बेचैन हो जाता है। ये एक आम लेकिन तकलीफ भरा समय होता है, जिसे teething problem in baby कहा जाता है। बच्चे के मसूड़ों में दर्द, खुजली और सूजन होती है, जिसकी वजह से वो बार-बार रोता है, दूध पीना छोड़ देता है या बार-बार चीजें मुंह में डालने लगता है। अगर बच्चा दांत निकलने के समय बहुत ज्यादा रो रहा हो, तो सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि ये फेज़ अस्थायी है। आप हल्के गुनगुने पानी से मसूड़ों की मालिश कर सकते हैं, या डॉक्टर से सलाह लेकर बेबी सेफ जेल इस्तेमाल कर सकते हैं।
ऐसे वक्त में बच्चे को ज़्यादा प्यार, धैर्य और आराम देने की जरूरत होती है। हर बच्चे की दांत निकलने की प्रक्रिया अलग होती है, लेकिन माता-पिता की समझदारी से ये समय आसानी से निकाला जा सकता है। अगर बच्चा लगातार रो रहा है, बुखार है या खाने-पीने में दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें। यही समय है जब आपको Google पर बार-बार सर्च करना पड़ता है: “दांत निकलते समय बच्चा बहुत रोता है, क्या करें?” – और यहीं से आपको इस लेख के ज़रिए सही समाधान मिलता है।
| समस्या / विषय | समाधान / जानकारी |
|---|
| दांत निकलने की उम्र | 6 महीने से 3 साल तक |
| सबसे पहले कौन से दांत निकलते हैं | नीचे के सामने के (6-10 महीने) |
| दर्द और सूजन क्यों होती है | मसूड़े फटते हैं, जलन होती है |
| लार अधिक क्यों बनती है | टीथिंग के दौरान ग्रंथियाँ ज़्यादा सक्रिय होती हैं |
| बच्चा रात में क्यों रोता है | दर्द और बेचैनी ज़्यादा महसूस होती है |
| भूख क्यों कम हो जाती है | मसूड़ों में जलन के कारण |
| हल्का बुखार या दस्त | कई बार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा |
| घरेलू उपाय | ठंडा कपड़ा, मसूड़ों की मालिश, टीथिंग रिंग |
| डॉक्टर को कब दिखाएं | तेज बुखार, लगातार दस्त, दूध न पीना |
| क्या न करें | शहद, बर्फ या सख्त टॉय न दें |
| सबसे जरूरी सुझाव | प्यार, धैर्य, साफ-सफाई और नींद |
1. मसूड़ों में दर्द और सूजन
दांत निकलने की प्रक्रिया के दौरान मसूड़े फटते हैं, जिससे उनमें जलन और दर्द होता है। यह दर्द बच्चा बयां नहीं कर सकता, इसलिए वह रोकर अपनी बेचैनी जताता है।
2. लार का अत्यधिक बहाव
इस दौरान शिशु की लार ज़्यादा बनने लगती है, जो गले में चुभन या मुंह के आसपास जलन पैदा कर सकती है।
3. नींद में बाधा
दांत निकलने का दर्द अक्सर रात में ज़्यादा महसूस होता है, जिससे बच्चा रात में बार-बार उठता है और रोता है।
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4. भूख में कमी
मसूड़ों में जलन के कारण शिशु दूध पीने या ठोस खाना खाने से मना करने लगता है। इससे उसका व्यवहार और ज़्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है।
5. बुखार और हल्का दस्त
हालांकि ये दांत निकलने के सीधे लक्षण नहीं हैं, लेकिन कई बार इस प्रक्रिया के साथ हल्का बुखार, दस्त या उल्टी जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं।
क्या करें जब बच्चा बहुत रोता हो?
1. ठंडी चीजें मुंह में देने से राहत
- एक साफ सूती कपड़ा गीला करके फ्रिज में रखें और फिर बच्चे को चबाने दें।
- टीथिंग रिंग को कुछ समय के लिए फ्रिज में रखकर बच्चे को दें। यह मसूड़ों को शांत करता है।
2. मसूड़ों की मसाज करें
- हाथ को अच्छी तरह धोकर धीरे से बच्चे के मसूड़ों पर उंगली से मालिश करें।
- यह तकनीक पुराने समय से आजमाई जाती रही है और वास्तव में बच्चे को सुकून देती है।
3. टीथिंग टॉय दें
- बाज़ार में सिलिकॉन से बने सुरक्षित टीथिंग टॉय मिलते हैं। उन्हें बच्चे को चबाने के लिए दें।
- ध्यान रखें कि वह BPA फ्री और बिना नुकीले कोनों वाला हो।
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4. बच्चे का ध्यान भटकाएं
- कुछ समय के लिए बच्चा दर्द भूल सकता है अगर उसका ध्यान किसी और तरफ हो जाए।
- रंग-बिरंगे खिलौने, कहानियां, गाने या बाहर की सैर इसमें मदद कर सकती हैं।
5. तरल और ठंडी चीज़ें दें खाने में
- दही, खीर, स्मूदी, ठंडा सूप जैसे खाद्य पदार्थ मसूड़ों को आराम देते हैं और पोषण भी पहुंचाते हैं।
लक्षण जिन्हें हल्के में न लें
कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें देख कर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है:
- 101°F से ज्यादा बुखार
- लगातार दस्त या उल्टी
- दूध पीना या खाना पूरी तरह छोड़ देना
- मसूड़ों से खून आना
- बार-बार कान को खींचना (यह कान के संक्रमण का संकेत हो सकता है)
- लगातार 2-3 दिन बहुत ज़्यादा रोना
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दवाइयों और जेल का इस्तेमाल – लेकिन सावधानी से
- यदि बच्चा बहुत रो रहा हो और कोई घरेलू उपाय असर न कर रहा हो तो डॉक्टर की सलाह से बच्चे को पेरासिटामोल दी जा सकती है।
- कुछ डॉक्टर टीथिंग जेल भी सलाह देते हैं लेकिन उनमें बेन्जोकाइन जैसे तत्व न हों इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
- कोई भी दवा या जेल बिना बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह के न दें।
क्या न करें?
- बर्फ सीधे मसूड़ों पर लगाने से बचें — यह नुकसान कर सकता है।
- शहद या कोई घरेलू पदार्थ मसूड़ों पर न लगाएं — 1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है।
- बहुत सख्त या प्लास्टिक के पुराने टीथिंग टॉय न दें।
- बच्चे को मीठी चीज़ें (जैसे चॉकलेट या मिश्री) शांत कराने के लिए न दें — इससे दांत सड़ सकते हैं।

माता-पिता के लिए खास सुझाव
- धैर्य रखें
यह एक अस्थायी चरण है। बच्चे की परेशानी असली है, लेकिन यह स्थिति कुछ हफ्तों में सुधरती है। - रात की नींद पूरी करने की कोशिश करें
बच्चा रात में जगेगा तो आपको भी नींद कम मिलेगी। इस दौरान एक-दूसरे की मदद लें — पति-पत्नी बारी-बारी से बच्चे को संभालें। - प्यार और स्नेह से बच्चा जल्दी संभलता है
दवा या टूल्स से कहीं ज़्यादा असर बच्चे को मिलने वाले प्यार, गले लगाने और आपकी उपस्थिति से होता है। - साफ-सफाई का ध्यान रखें
जो भी चीज़ बच्चा मुंह में डालता है, वह बिल्कुल साफ होनी चाहिए ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
निष्कर्ष : दांत निकलते समय बच्चा बहुत रोता है, क्या करें?
दांत निकलना बच्चे के जीवन का एक जरूरी लेकिन थोड़ा कष्टदायक चरण है। इस दौरान बच्चा जब बहुत रोता है, तो यह उसकी तकलीफ का संकेत होता है, जिसे समझना और प्यार से हल करना माता-पिता की जिम्मेदारी है। घरेलू उपाय, टीथिंग टॉय, साफ-सफाई और सही समय पर डॉक्टर की सलाह से आप इस दौर को बहुत आसान बना सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए देखें: HealthySamaj.com

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